समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और दुद्धी (आरक्षित) विधानसभा सीट से विधायक विजय सिंह गोंड का लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई) में इलाज के दौरान निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहे विजय सिंह गोंड की दोनों किडनी खराब हो गई थीं, जिसके कारण उन्हें लखनऊ में भर्ती कराया गया था। उनके निधन की पुष्टि विधानसभा अध्यक्ष ने की।
विजय सिंह गोंड आदिवासी समाज के प्रमुख चेहरों में से एक थे और उन्हें दुद्धी क्षेत्र की आदिवासी राजनीति का ‘पितामह’ कहा जाता था। उनके निधन से सोनभद्र, वाराणसी और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई है। राजनीतिक दल, कार्यकर्ता और आदिवासी समुदाय उन्हें अपूरणीय क्षति बता रहे हैं।
विजय सिंह गोंड ने अपना राजनीतिक करियर वनवासी सेवा आश्रम में मामूली मानदेय पर काम करते हुए शुरू किया। 1979 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। दुद्धी और ओबरा सीटों को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कराने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट तक संघर्ष किया।
1989 में अपने राजनीतिक गुरु को हराकर उन्होंने नया कीर्तिमान स्थापित किया। विभिन्न पार्टियों से जुड़ते हुए वे कुल आठ बार विधायक बने। सदन में आदिवासी हितों और अधिकारों की आवाज बुलंद करने में उनकी अहम भूमिका रही। उन्होंने आदिवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उल्लेखनीय काम किया।
उनके निधन पर समाजवादी पार्टी सहित अन्य दलों के नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। आदिवासी समाज में उनकी कमी लंबे समय तक खलेगी।





