उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक हैरान करने वाली और भावुक घटना सामने आई है। खतौली कस्बे के मोहल्ला बालाराम निवासी बुजुर्ग शरीफ अहमद, जिन्हें परिवार 28 साल से मृत मान चुका था, अचानक घर लौट आए। वजह बनी पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया, जिसके लिए जरूरी दस्तावेजों की जरूरत पड़ी।
शरीफ की पहली पत्नी का निधन 1997 में हो गया था। इसके बाद उन्होंने दूसरी शादी की और पत्नी के साथ पश्चिम बंगाल चले गए। शुरुआत में लैंडलाइन फोन से संपर्क रहा, लेकिन धीरे-धीरे यह टूट गया। परिवार ने पश्चिम बंगाल के खड़गपुर, आसनसोल सहित कई जगहों पर उन्हें ढूंढने की कोशिश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार, परिवार ने मान लिया कि शरीफ की मौत हो चुकी है।
79 वर्षीय शरीफ 29 दिसंबर 2025 को अपने पैतृक घर लौटे। SIR प्रक्रिया के लिए सरकारी कागजात जमा करने की जरूरत थी, इसलिए वे आए। उनके अचानक आने से परिवार, पड़ोसी और रिश्तेदारों में खुशी की लहर दौड़ गई। घर पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। दूर के रिश्तेदारों ने वीडियो कॉल से उनसे बात की।
शरीफ के भतीजे मोहम्मद अकलम ने बताया कि परिवार ने 15-20 साल तक उन्हें ढूंढा, लेकिन असफल रहा। वापसी की खबर पर पहले यकीन नहीं हुआ। शरीफ को यह भी पता चला कि इन 28 सालों में उनके कई करीबी रिश्तेदार गुजर चुके हैं।
शरीफ ने खुद बताया कि 1997 में दूसरी शादी के समय सीमित साधनों और कम्युनिकेशन सुविधाओं की कमी से संपर्क टूट गया। वे सिर्फ दस्तावेजों के लिए आए थे और काम पूरा होने के बाद पश्चिम बंगाल लौट गए, जहां वे अपनी दूसरी पत्नी और बच्चों के साथ रहते हैं।
यह घटना पश्चिम बंगाल में चल रही वोटर लिस्ट की स्पेशल रिवीजन प्रक्रिया का अनोखा नतीजा है, जिसने एक बिछड़े परिवार को कुछ पलों के लिए फिर से जोड़ दिया।




