दिल्ली में, ‘महिला आयोग के 223 कर्मचारियों को’ किसने हटाया

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चित्र : दिल्ली के उप-राज्यपाल वीके सक्सेना।

नई दिल्ली। दिल्ली के उप-राज्यपाल वीके सक्सेना ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राजधानी के महिला आयोग के 223 कर्मचारियों को हटा दिया है। आम आदमी पार्टी सांसद स्वाति मालीवाल पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान नियमों का उल्लंघन करते हुए ये नियुक्तियां कीं थी।

मालीवाल ने उपराज्यपाल के आदेश की आलोचना करते हुए कहा कि अगर सभी संविदा कर्मचारियों को हटा दिया गया तो महिला आयोग बंद हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पैनल में अब कुल 90 कर्मचारी हैं। उनमें से 8 सरकारी हैं और बाकी तीन महीने के अनुबंध पर हैं। वे ऐसा क्यों कर रहे हैं? इस संगठन को खून-पसीने से सींचा गया है।” उपराज्यपाल को उन्हें जेल में डालने की चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि मैं महिला आयोग को बंद नहीं होने दूंगी। मुझे जेल में डाल दो, लेकिन महिलाओं पर अत्याचार मत करो।

तो वहीं, उप-राज्यपाल कार्यालय की ओर से जारी आदेश में दिल्ली महिला आयोग अधिनियम का हवाला देते हुए कहा गया है कि आयोग में 40 कर्मचारियों की स्वीकृत संख्या है और उपराज्यपाल की मंजूरी के बिना 223 नए पद सृजित किए गए। आदेश में यह भी कहा गया है कि आयोग को अनुबंध पर कर्मचारियों को नियुक्त करने का अधिकार नहीं है। यह कार्रवाई फरवरी 2017 में तत्कालीन उपराज्यपाल को सौंपी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के अतिरिक्त निदेशक द्वारा जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि नियुक्तियों से पहले आवश्यक पदों का कोई मूल्यांकन नहीं किया गया। आदेश में कहा गया है कि आयोग को सूचित किया गया है कि वे वित्त विभाग की मंजूरी के बिना ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय दायित्व आए।

जांच में पाया गया कि ये नियुक्तियां निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार नहीं की गई थीं। इसमें आगे कहा गया, “इसके अलावा, डीसीडब्ल्यू के कर्मचारियों के पारिश्रमिक और भत्ते में वृद्धि बिना किसी उचित कारण के की गई और निर्धारित प्रक्रियाओं और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।”

‘आप’ सांसद के रूप में राज्यसभा में प्रवेश करने से पहले, मालीवाल नौ साल तक दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष रहीं। पैनल के अध्यक्ष का पद फिलहाल खाली है। आदेश में उल्लेख किया गया है कि मालीवाल को नियुक्तियों के संबंध में वित्त विभाग की मंजूरी लेने के लिए बार-बार सलाह दी गई थी।

यह कार्रवाई राष्ट्रीय राजधानी के प्रशासन को लेकर उपराज्यपाल कार्यालय और सत्तारूढ़ आप के बीच एक और टकराव का मुद्दा बनने जा रही है। ‘आप’ ने बार-बार उप-राज्यपाल के कार्यालय पर उसके प्रशासनिक कदमों को रोकने का आरोप लगाया है। उप-राज्यपाल केंद्र द्वारा नियुक्त व्यक्ति है और आप ने सत्तारूढ़ बीजेपी पर उसे स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति नहीं देने का आरोप लगाया है।

बता दें कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ‘आप’ नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जेल में हैं।

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