ममता बनर्जी ने की पूर्व न्यायाधीश की आलोचना, कहा ‘न्यायपालिका पर कलंक’

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चित्र : ममता बनर्जी।

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय पर निशाना साधते हुए उन्हें न्यायपालिका पर कलंक बताया। बता दें गंगोपाध्याय मार्च में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हुए थे और पूर्वी मिदनापुर जिले के तामलुक से लोकसभा चुनाव 2024 में उम्मीदवार हैं। तो वहीं, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने युवा नेता देबांगशु भट्टाचार्य को इसी सीट से मैदान में उतारा है।

तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने तामलुक में लोकसभा चुनाव प्रचार रैली में कहा कि आप न्यायपालिका पर कलंक हैं। हालांकि उन्होंने अपने भाषण में एक बार भी पूर्व न्यायाधीश का नाम नहीं लिया।

गंगोपाध्याय, साल 2022 में पश्चिम बंगाल में स्कूल शिक्षा विभाग में कथित रिश्वत-नौकरी घोटाले की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को आदेश दिया था, ने सेवानिवृत्ति से पांच महीने पहले 5 मार्च को सेवा से इस्तीफा दे दिया और 7 मार्च को बीजेपी में शामिल हो गए।

5 मार्च को मीडिया से बात करते हुए गंगोपाध्याय ने कहा, ‘मैंने बीजेपी से संपर्क किया और बीजेपी ने पिछले सात दिनों में मुझसे संपर्क किया। इसलिए मैं इस दौरान छुट्टी पर था। मैंने फैसला सुनाना बंद कर दिया ताकि कोई आरोप न लगा सके।’

तो वहीं, गंगोपाध्याय की आलोचना करते हुए बनर्जी ने कहा कि आप उस व्यक्ति से न्याय की उम्मीद कैसे कर सकते हैं जो (न्यायाधीश की) कुर्सी पर बैठा हो और फोन पर बीजेपी से बात करता हो और एक राजनीतिक दल के लिए काम करता हो?

आपको बता दें कि कथित शिक्षा विभाग घोटाले ने सोमवार से पूरे बंगाल में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जब कलकत्ता हाईकोर्ट ने माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षण और गैर-शिक्षण नौकरियों के लिए 2016 में सूचीबद्ध सभी 25,753 लोगों की नियुक्ति रद्द कर दी। ये लोग न्याय की मांग करते हुए हज़ारों की संख्या में सड़कों पर उतर आए हैं।

गंगोपाध्याय ने सोमवार के फैसले के बाद ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग की। बनर्जी ने रैली में आरोप लगाया, ‘न्यायाधीश के पद पर रहते हुए गंगोपाध्याय ने बीजेपी के निर्देश पर रोजगार संकट पैदा किया। इस सीट से चुनाव लड़ रहे व्यक्ति को लगता है कि यह भी एक अदालत है। वह लोगों से इस्तीफा देने के लिए कह रहा है। आप न्यायपालिका पर कलंक हैं।आपको अपनी शर्म छिपानी चाहिए। आपको लोगों से बात करने का कोई अधिकार नहीं है। आपने बीजेपी के निर्देश पर कुछ हज़ार नियुक्तियां रोक दीं। इन युवाओं का क्या होगा?’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सोमवार का आदेश बीजेपी के निर्देश पर पारित किया गया, क्योंकि चुनाव कराने के लिए स्कूल शिक्षकों को तैनात किया जाता है और मतदान केंद्र शैक्षणिक संस्थानों में स्थापित किए जाते हैं।

दीदी ने कहा कि मैं किसी विशेष न्यायाधीश के खिलाफ कुछ नहीं कह रही हूं, लेकिन अब स्कूल कौन चलाएगा? योजना यह है कि इन लोगों को चुनाव ड्यूटी करने से रोका जाए ताकि वे (बीजेपी) उस काम के लिए केंद्रीय बलों को ला सकें।

बता दें कि मई 2022 में, गंगोपाध्याय ने सीबीआई को पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग और पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा 2014 और 2021 के बीच गैर-शिक्षण कर्मचारियों (ग्रुप सी और डी) और शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति की जांच करने का आदेश दिया।

कथित तौर पर नियुक्त लोगों ने चयन परीक्षा में असफल होने के बाद नौकरी पाने के लिए 5-15 लाख रुपये की रिश्वत दी। मामले की समानांतर जांच शुरू करने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जुलाई 2022 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया। तब से अब तक करीब एक दर्जन टीएमसी नेताओं और सरकारी अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

केंद्रीय एजेंसियों के अनुसार, बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी शिक्षा विभाग घोटाले में संदिग्ध हैं।

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