पाकिस्तान और ईरान ने कहा, ‘कश्मीर मुद्दे का हल शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए’

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चित्र : ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी (बाएं) पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से हाथ मिलाते हुए।

इस्लामाबाद। ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की 24 अप्रैल को पहली यात्रा के बाद दोनों देशों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि पाकिस्तान और ईरान इस बात पर सहमत हुए हैं कि कश्मीर मुद्दे को क्षेत्र के लोगों की इच्छा के आधार पर शांतिपूर्ण तरीकों से हल किया जाना चाहिए।

राष्ट्रपति रईसी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के निमंत्रण पर 22-24 अप्रैल तक पाकिस्तान का आधिकारिक दौरा किया। उनके साथ विदेश मंत्री आमिर अब्दुल्लाहियन, कैबिनेट के अन्य सदस्य और वरिष्ठ अधिकारियों सहित एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी था।

राष्ट्रपति रईसी की पाकिस्तान यात्रा के समापन पर जारी संयुक्त बयान में कश्मीर का मुद्दा शामिल किया। इसमें कहा गया कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर विकास को ध्यान में रखते हुए, दोनों पक्षों ने आम चुनौतियों के लिए पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजने के लिए बातचीत और कूटनीति के माध्यम से विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को हल किए जाने की जरूरत है।

दोनों पक्षों ने उस क्षेत्र के लोगों की इच्छा के आधार पर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से कश्मीर मुद्दे को हल करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। यहां बता दें कि भारत ने पहले भी कश्मीर मुद्दे पर अन्य देशों के ऐसे बयानों को खारिज किया है।

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की 24 अप्रैल को पहली यात्रा के बाद दोनों देशों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि पाकिस्तान और ईरान इस बात पर सहमत हुए हैं कि कश्मीर मुद्दे को क्षेत्र के लोगों की इच्छा के आधार पर शांतिपूर्ण तरीकों से हल किया जाना चाहिए।

पाकिस्तान, सऊदी अरब ने कश्मीर मुद्दे के समाधान का आह्वान किया। इसमें कहा गया कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर विकास को ध्यान में रखते हुए, दोनों पक्षों ने आम चुनौतियों के लिए पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजने के लिए बातचीत और कूटनीति के माध्यम से विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के महत्व पर बल दिया।

तो वहीं, भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बार-बार कहा है कि जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं और हमेशा रहेंगे। किसी अन्य देश को इस पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।

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