क्या घोसी लोकसभा सीट पर फंस गए राजभर के युवराज ?

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देश में सातवें चरण के मतदान भी संपन्न हो गए 4 जून को मतगणना के बाद परिणाम भी सामने आएंगे देश की कई हाई प्रोफाइल लोकसभा सीट ऐसी भी थी जिस पर सब की निगाह बनी हुई थी , उत्तर प्रदेश में भी एक दर्जन से अधिक हाई प्रोफाइल लोकसभा सीटें थी जिस पर सब की निगाहें थी और इस हाई प्रोफाइल सीटों में एक सीट है घोसी लोकसभा सीट l

मऊ जनपद के अंतर्गत घोसी लोकसभा सीट पर उत्तर प्रदेश की राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाने वाले ओपी राजभर के बेटे अरविंद राजभर चुनाव लड़ रहे हैं और सामने से कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी राजीव राय और माहौल को त्रिकोणी बना रहे हैं बसपा प्रत्याशी बालकृष्ण चौहान, घोसी में मतदान संपन्न हो गया है करीब 54 फ़ीसदी वोटिंग हुई है जिसके बाद से सियासी गलियारे में ऐ चर्चा है कि आखिर घोसी के घमासान में कौन जीत रहा हैl

घोसी लोकसभा सीट पर तकरीबन 54 फ़ीसदी मतदान हुआ है टोटल वोटर्स की संख्या की बात की जाए तो 20 लाख 83 हजार 928 मतदाता घोसी लोकसभा सीट पर भाग्य विधाता बनते हैं इनमें पुरुष वोटरों की संख्या 11 लाख 3 हजार 551 है वहीं महिला वोटो की संख्या 9 लाख 80 हजार 302 है और थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 75 है और इनमें से 54 फ़ीसदी मतदान का आंकड़ा लगभग साढे 11 लाख है l

घोसी लोकसभा सीट पर राजभर चौहान और मुस्लिम मतदाताओं के साथ दलित मतदाताओं का दबदबा है लेकिन यादव क्षत्रिय और भूमिहार मतदाता भी निर्णायक है ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि दलित और चौहान मतदाता बड़ी संख्या में बीएसपी प्रत्याशी बालकृष्ण चौहान का समर्थन किया है वही मुस्लिम यादव और इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी राजीव राय के भूमिहार वर्ग के मतों की वजह से इंडिया गठबंधन प्रत्याशी राजीव राय की स्थिति बेहद मजबूत बताई जा रही है l

वहीं अरविंद राजभर जो उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बेटे हैं वह क्षत्रिय ब्राह्मण राजभर और अन्य पिछड़ी जातियों के साथ लाभार्थी वोट बैंक के सहारे चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बेटे डॉक्टर अरविंद राजभर की चुनावी डगर क्यों कठिन बताई जा रही है और उसके पीछे सबसे बड़ा कारण क्या है लिए आपको बताते हैं l

विधानसभा चुनाव में बीजेपी व राजपूतों पर राजभर के बयान से खफा थे राजपूत

2022 के विधानसभा चुनाव में ओमप्रकाश राजभर ने अपनी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का गठबंधन समाजवादी पार्टी से किया था इस दौरान ओमप्रकाश राजभर ने मंच से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारतीय जनता पार्टी के लिए अपशब्द का इस्तेमाल किया था यही वजह है कि जब अरविंद राजभर चुनाव लड़ने पहुंचे तो भाजपा के कार्यकर्ताओं ने गठबंधन के बावजूद उनका विरोध किया हालांकि बाद में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य ने स्थिति पर नियंत्रण के लिए बहुत प्रयास किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुनावी रैली में अरविंद राजभर घुटने टेक कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चरणों में बैठ गए और राजपूत मतदाताओं को इशारों इशारों में मनाने का प्रयास किया गया l

विधान परिषद के पूर्व सदस्य यशवंत सिंह का निष्कासन समाप्त कर भाजपा ने उन्हें वापस बुलाया और घोसी लोकसभा सीट पर चुनाव प्रचार के लिए भेजा , भाजपा और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने अपनी सीट को सुरक्षित करने के लिए राजपूत मतदाताओं को लुभाने के लिए नाराज राजपूत को मनाने के लिए बड़ी संख्या में क्षत्रिय वर्ग के नेताओं को प्रचार में उतारा , भूमिहार वर्ग को भी भाजपा अपने पाले में करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अरविंद शर्मा को घोसी लोकसभा सीट पर ओमप्रकाश राजभर के बेटे अरविंद राजभर के प्रचार के लिए भेजा l

विधानसभा उपचुनाव हारने के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार में कारागार मंत्री बनाए गए दारा सिंह चौहान भी चौहान मतदाताओं को राजभर के पक्ष में लामबंद करते हुए नजर आए कुल मिलाकर 54 फीसदी मतदान के बाद मतदाता और राजनीतिक जानकार भी आकलन लगा रहे हैं कि ओमप्रकाश राजभर के बेटे की राह कठिन हो सकती है क्योंकि इसके पीछे राजपूत मतदाता बड़ी वजह हैं अगर राजपूत मतदाताओं ने नाराजगी दूर करके ओमप्रकाश राजभर को वोटिंग की होगी तब तो राजभर का रास्ता साफ है और नही एक बार फिर से डॉक्टर अरविंद राजभर जो उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बेटे हैं उनकी राह कठिन हो सकती हैl

एग्जिट पोल मे पिछड़े राजभर

लोकसभा चुनाव परिणाम के पहले कल दर्जन भर से अधिक समाचार संस्थाओं ने एग्जिट पोल जारी किया और लगभग सभी एग्जिट पोल में ओमप्रकाश राजभर के बेटे अरविंद राजभर को पिछड़ता हुआ दिखाया है अब क्या धरातल पर सच्चाई यही है कि अरविंद राजभर पीछे रहे हैं या फिर नाराज मतदाताओं ने योगी और मोदी के नाम पर अरविंद राजभर की नैया पार लगाने का काम किया है दो दिन बाद 4 जून को तस्वीर साफ हो जाएगी लेकिन सूत्रों की माने तो ओमप्रकाश राजभर के बेटे डॉ अरविंद राजभर की राहें बहुत कठिन हैl

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