हाथरस मामलें में योगी सरकार ने लिया बड़ा एक्शन ,लेकिन बाबा पर सीएम मौन

0
44

बीते दिनों हाथरस में हुई भगदड़ के बाद 121 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद इस मामले की जांच एसआईटी को दे दी गई थी. जिसकी रिपोर्ट शासन को सौंपी गई थी. हाथरस भगदड़ मामले में एसआईटी ने बीते शुक्रवार को जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी थी. इसमें 100 लोगों के बयान दर्ज किए गए थे. अब इस रिपोर्ट के आधार पर एक्शन लिया गया है. इस रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम और सीओ के खिलाफ एक्शन हुआ है. सरकार ने दोनों को निलंबित कर दिया है .यह एक्शन एसआईटी की रिपोर्ट के बाद लिया गया था. वहीं एडीजी आगरा और अलीगढ़ कमिश्नर की अगुवाई में मामले की जांच चल रही है.

also read केशव का गिरता ग्राफ BJP ने तलाशा ये नया चेहरा

सिर्फ मुआवजा, एक्शन की मांग नहीं...भोले बाबा पर मौन क्यों हैं राजनीतिक  पार्टियां? | hathras stampede accident rahul gandhi akhilesh yadav cm yogi  dalit vote bank bjp bsp sp | TV9 Bharatvarsh

हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए थे. इसके लिए उन्होंने समिति भी गठित की थी.
एडीजी आगरा जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ और मंडलायुक्त चैत्रा वी को एसआईटी में शामिल किया गया था. शासन की ओर से इन्हें 24 घंटे के अंदर जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था. वैसे शासन की ओर से बीते बुधवार तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था, लेकिन सीएम योगी के घटनास्थल पर जाने और राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने की वजह से निर्धारित समय अवधि तक जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी जा सकी थी.इसके बाद, अधिकारियों ने शासन से अपनी जांच रिपोर्ट तैयार करने के लिए तीन दिनों का अतिरिक्त समय मांगा था. अब जांच रिपोर्ट मिलने के बाद शासन की ओर से आने दिनों में क्या कुछ कदम उठाया जाएगा इसपर सबकी नजर थी, अब इस कार्रवाई के बाद सबकी निगाहें आगे के एक्शन पर टिकी हुई हैं.बता दें कि बीते दिनों उत्तर प्रदेश के हाथरस में बाबा साकार हरि का सत्संग आयोजित किया गया था. इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए वैसे प्रशासन की ओर से 80 हजार लोगों को मंजूरी मिली थी, लेकिन कार्यक्रम में ढाई लाख से भी ज्यादा लोग शामिल हो गए. कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब लोगों के बाहर जाने का वक्त आया तो भगदड़ मच गई थी.

लेकिन sit के रिपोर्ट के बाद अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या इसमें बाबा की कोई गलती नही है सिर्फ और सिर्फ प्रशासन इसका जिम्मेदार है बाबा को तो पहले गिरफ्तार करना चाहिए था क्यों जब बाबा को 80 हजार की अनुमति थी तो ढाई लाख लोग कैसे आ गए बाबा को इसके लिए प्रशासन से मदद मांगनी चाहिए थी और जब बाबा के सेवादारों ने पुलिस वालों को क्यों अंदर नही जाने देते है ,तो बाबा ने अपनी चरणों की रज को उठाने के लिए क्यों बोला था ,क्या बाबा को ये नही पता था कि इसमें भगदड़ मच सकती है ,या तो उसके लिए बाबा को बैरिकेटिंग करके एक एक लोगों की भेजने की व्यवस्था करता ,कुलमिलकर इसमें प्रशासन की गलती तो है ही लेकिन बाबा की और उनके सेवादारों को सबसे पहले गिरफ्तारी होना चाहिये था ,अब ऐसा लोगो का मानना है कि कहीं न कहीं बाबा की पालिटिकल कैरियर तो नही है जो बाबा को बचाने का कार्य कर रहा है ,क्यों कि बाबा के साथ बाबा को मानने वाले बहुत से ऐसे भक्त है जो बाबा के बचाने के लिए अपनी जान भी दे सकते है ,सबसे पहले अगर बात करें तो बाबा कि जितनी प्रापर्टी है जितने लोगों की जान गई है सरकार उनके परिवारों जमीन बेंचकर दे देना चाहिए ये तो बाबा को खुद सोंचना चाहिए कि मानव सेवा ही मानव धर्म है ये बाबा खुद कहते है तो इतना पैसा लेकर बाबा क्या करेंगें मुआवजा सरकार तो दे ही रही है लेकिन बाबा को भी उन मृतको के परिवरों को पैसा कम से कम 50 -50 लाख देना चाहिए आखिर थे तो इन्ही बाबा के ही भक्त तो कहीं न कहीं न कहीं बाबा साकार हरि को न गिरफ्तार करना सवाल खडे कर रहा है कि आखिर बाबा क्यों नही गिरफ्तार किया जा रहा है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here