लोकसभा और राज्यसभा से वक्फ संशोधन बिल पारित होने के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश में अवैध रूप से वक्फ घोषित की गई संपत्तियों पर कार्रवाई का ऐलान कर दिया है। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अभियान चलाकर ऐसी संपत्तियों की पहचान करें और उन्हें जब्त करें।
सरकारी आंकड़ों की बात करें तो, राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में सिर्फ 2963 वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं, जबकि सुन्नी वक्फ बोर्ड की 1.24 लाख और शिया वक्फ बोर्ड की करीब 7700 संपत्तियां मौजूद बताई गई हैं। ऐसे में सरकार को शक है कि बड़ी संख्या में सरकारी जमीनें जैसे खलिहान, तालाब, पोखर आदि को अवैध रूप से वक्फ घोषित कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि वक्फ उन्हीं संपत्तियों पर लागू होता है जिन्हें किसी ने दान दिया हो, न कि सरकारी भूमि पर।
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98% वक्फ संपत्तियों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं
राज्य सरकार के अधिकारियों का दावा है कि लगभग 98 प्रतिशत वक्फ घोषित संपत्तियों का कोई वैध दस्तावेज या रिकॉर्ड नहीं है। ज़्यादातर ज़मीनें ग्राम समाज की हैं, जिन्हें गलत तरीके से वक्फ में दर्ज किया गया। अब इन संपत्तियों को चिन्हित कर जप्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
इन जिलों में सबसे ज्यादा वक्फ संपत्तियां
बाराबंकी, सीतापुर, बरेली, जौनपुर, सहारनपुर, बिजनौर, बलरामपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, मुरादाबाद और रामपुर में सबसे ज्यादा वक्फ संपत्तियां हैं। इन जिलों के डीएम को निर्देश मिला है कि वे वक्फ संपत्तियों का सत्यापन कर रिपोर्ट शासन को भेजें। इसके बाद नए संशोधित कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज़
वक्फ बिल पास होने और यूपी में एक्शन शुरू होते ही सियासत भी गरमा गई है।सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा, “हमने पहले ही अंदेशा जताया था, अब वही सच साबित हो रहा है।”वहीं, बीजेपी प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने कहा, “सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे को हटाना सरकार का कर्तव्य है। यदि किसी के पास वैध दस्तावेज हैं तो उन्हें डरने की जरूरत नहीं, लेकिन बिना दस्तावेजों के संपत्तियों को जब्त किया जाएगा। विवाद की स्थिति में कोर्ट का रास्ता खुला है।”योगी सरकार के इस फैसले से आने वाले दिनों में राजनीति और ज़मीनों को लेकर विवाद और तेज़ होने की संभावना है।