प्रधान मंत्री का रूस दौरा क्यों है खास, अमेरिका इतना बैचेन क्यों

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को रूस और ऑस्ट्रिया के तीन दिवसीय दौरे के लिए रवाना हो गए। इस दौरे से पहले पीएम मोदी ने भारत-रूस के संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी पिछले दस वर्षों में आगे बढ़ी है।मॉस्को दौरे से पहले पीएम मोदी ने कहा, “मैं अपने मित्र राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा करने के लिए उत्सुक हूं।” रूस के अलावा पीएम मोदी ऑस्ट्रिया दौरे पर भी जाएंगे। उन्होंने ऑस्ट्रिया को भारत का दृढ़ और विश्वसनीय भागीदार बताया। पीएम मोदी ने कहा, “हम लोकतंत्र के आदर्शों को साझा करते हैं। मैं नए क्षेत्रों में हमारी साझेदारी को और अधिक ऊंचाइयों तक ले जाने की आशा करता हूं।”

पीएम मोदी 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस की अपनी दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान अज्ञात सैनिक की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री तीन दिन रूस और ऑस्ट्रिया में रहेंगे। उनकी ये यात्राएं उन देशों के साथ संबंधों को गहरा करने का अवसर है, जिनके साथ भारत की परखी हुई दोस्ती है। उन्होंने कहा, मैं इन देशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ बातचीत करने के लिए उत्सुक हूं।वही मोदी के रूस यात्रा को लेकर पश्चिम के देशों में विरोध देखने को मिल सकता हैं ,वजह ये है कि पश्चिम देश जहा एक तरफ रूस का विरोध कर रहे यूक्रेन यूद्ध को लेकर ,लेकिन प्रधान मंत्री का ये दौरा भारत के लिहाज से बहुत बढ़िया माना जा रहा ,कहा जा रहा है कि पीएम ये दौरा सुरक्षा अर्थव्यवश्ता और व्यापार को बढ़ाने वाला हैं ,अमेरिका और यूरोपीय देशों को चिंता है कि व्यापार और रक्षा सहयोग सहित रूस के साथ भारत की निरंतर भागीदारी, यूक्रेन में रूस की आक्रामकता को रोकने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय दबाव अभियान को कमजोर करती है.वे चाहते हैं कि भारत, जो रूस से अपने ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा ख़रीदता है वो अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रतिबंधों का सम्मान करे. भारत जानता है कि यह एक जटिल मुद्दा है.भारत संवाद और कूटनीति की वकालत करते हुए अपने रणनीतिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा ज़रूरतों के बीच संतुलन बनाने के लिए अपने कौशल पर निर्भर करता है.

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