उपचुनाव में कौन मारेगा बाजी ,किसकी है कितनी तैयारी ?

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लोकसभा चुनाव में यूपी में शानदार प्रदर्शन करने वाले सपा-कांग्रेस के गठबंधन की अगली परीक्षा उपचुनाव होने वाली हैं । हालांकि ये उपचुनाव बीजेपी के लिए भी किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं हैं ,आपको बताते चले कि देश भर में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यूपी में इंडिया गठबंधन और अकेले सपा से करारी हार का सामना करना पड़ा है।

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ऐसे स्थिति में बीजेपी अपनी पूरी ताकत उपचुनाव में झोकने वाली हैं ,अब देखने वाली बात ये होगी कि उपचुनाव में किसको जनता का साथ मिलता हैं। क्योकि अब सबकी निगाहें उपचुनाव पर टिक गई हैं। दरअसल लोकसभा चुनाव में कई ऐसे नेताओं ने चुनाव लड़ा था जो विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य थे। अब इन नेताओं ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। अब इन सीटों पर जल्द ही उपचुनाव होना तय है।

इन सीटों पर होगा उपचुनाव

मैनपुरी की करहल सीट, अम्बेडकर नगर की कटेहरी, अयोध्या की मिल्कीपुर, मुरादाबाद की कुंदरकी, गाजियाबाद सदर, प्रयागराज की फूलपुर, मिर्जापुर जिले की मझवा, मुजफ्फरनगर की मीरापुर व कानपुर की कैंट सीट पर उपचुनाव होगा.ऐसे में एक बार फिर समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच मुख्य रूप से सियासी घमासान देखने को मिलेगा. लोकसभा चुनाव में आए परिणामों से इंडिया गठबंधन पूरी तरह से उत्साहित है और भाजपा का प्रदेश से सफाई करने का दावा किया जा रहा है. जबकि भाजपा लोकसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाने और संगठन सरकार के स्तर पर जो खामियां रही, उन्हें दूर करते हुए चुनौतियों से पार पाने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है.

अगले महीने हो सकता है चुनाव की घोषणाः

बता दें कि यूपी की नौ विधानसभा सीटों से विधायक रहे नेता लोकसभा चुनाव में संसद सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए हैं. ऐसे में इन सीटों पर उपचुनाव होगा. साथ ही कानपुर की एक सीट से विधायक इरफान सोलंकी को सजा मिलने के बाद रिक्त हो गई है. ऐसे में 10 सीटों पर उपचुनाव आने वाले समय में होगा. निर्वाचन आयोग के स्तर पर जुलाई महीने में उपचुनाव की तारीखों का ऐलान किया जा सकता है. 6 महीने के अंदर ही उपचुनाव कर जाने की व्यवस्था है. ऐसे में विधायकों की तरफ से सांसद निर्वाचित होने के बाद विधानसभा सदस्यता से त्यागपत्र भी दिया जा चुका है. इनमें अखिलेश यादव से लेकर अवधेश प्रसाद चंदन चौहान जैसे नवनिर्वाचित सांसदों ने विधानसभा सदस्यता से अपने त्यागपत्र दे दिए हैं.

भाजपा और सपा की मुश्किलें बढ़ाएंगे चंद्रशेखर

लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर चंद्रशेखर नए दलित नेता के रूप में उभरे हैं। चंद्रशेखर अब विधानसभा उपचुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहे हैं। अगर चंद्रशेखर मैदान में अपने उम्मीदवार उतारते हैं तो ये भाजपा और सपा दोनों पार्टियों के लिए लिए मुसीबत बन सकता है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील चित्तौड़ ने बताया कि पार्टी ने विधानसभा उपचुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। सारे बूथ और सेक्टर कमेटियों को सक्रिय कर दिया गया है। कार्यकर्ताओं में जोश है। उन्होंने बताया कि सभी सीटों पर अकेले लड़ने की तैयारी है। जहां-जहां चुनाव होने हैं वहां बैठकों का दौर जारी है। प्रदेश स्तर के नेता माहौल और समीकरण को समझ रहे हैं।

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