चीन के युन्नान प्रांत में पुलिस और मुस्लिम प्रदर्शनकारी आमने-सामने

आज हम बात कर रहे है चीन की जहां पर इस समय एक मस्जिद के कुछ ढाचों को ,चीन की सरकार ने नेस्तनाबूत कर दिया गया है जिसके बाद चीन के युन्नान प्रांत में पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने आ गए ।

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चीन सरकार के द्वारा मस्जिद गिराने के बाद हिंसा और झड़प के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। माना जा रहा है कि जिस मस्जिद को चीनी सरकार ने गिराने की कोशिश की है वो 14वीं शताब्दी की ऐतिहासिक नजियायिंग मस्जिद के रूप में जाना जाता हैं। । जो यहां के हुई मुसलमानों के लिए बेहद खास है।2020 में में एक अदालत ने इस मस्जिद पर एक फैसला सुनाया था और निर्धारित किया था कि गुंबददार छत और मीनारों सहित मस्जिद के सबसे हालिया परिवर्धन अवैध है, जिनको हटा दिया जाना चाहिए। हालांकि, विध्वंस का काम शुरू हुआ तो बीच में ही बवाल और हिंसा शुरू हो गयी।कहा जाता है जहां मस्जिद है वहां के आसपास हुई मुस्लिम समुदाय के लोगों का घर है, ज्यादातर मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं, मुसलमानों के उग्र विरोध के कारण पुलिस मस्जिद के अवैध निर्माण को नहीं गिरा सकी। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मस्जिद के बाहर पुलिसकर्मियों और मुसलमानों की भारी भीड़ देखी जा सकती है।

इस दौरान पुलिस और मुसलमानों के बीच लड़ाई हो गई और मस्जिद में घुसने का प्रयास करने वाले पुलिसकर्मियों पर पथराव किया गयाऔर देखते ही देखते छोटी सी लड़ाई ने हिंसा का रूप ले लिया कथित तौर पर इस हिंसा के बाद कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों को आत्मसमर्पण करने के लिए 6 जून का समय सीमा निर्धारित किया गया है।चीन सरकार द्वारा कोई ये पहली बार नहीं है कि वो चीन में मस्जिदों को गिरा रही है इससे पहले भी चीन सरकार ने देश में मौजूद कई सारी पुरानी व ऐतहासिक मस्जिदों को धराशायी कर चुकी हैं। इस लिए चीन में रह रहे मुस्लिम समुदाय को ये डर है कि उनके इस हजारों साल की पुरानी मस्जिद को चीनी सरकार कभी भी गिरा सकती हैं। चीन में रह रहे मुस्लिम समुदाय को मुस्लिम देशों से उम्मीद है कि वो इसमें उनकी मदद करेंगे लेकिन मुस्लिम देशों की चुप्पी अब धीरे धीरे चीनी मुस्लिमों के आस को ख़त्म कर दे रही है।

चीन सरकार के ऊपर लगातार 2014 के बाद से, शिनजियांग में रहने वाले उइघुर मुसलमानों के खिलाफ मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन में लगी हुई है , जिसमें जबरन नसबंदी और जबरन श्रम शामिल है, जिसकी तुलना दुनियां में नरसंहार के कृत्यों से की गई है। अब देखने वाली बात ये भी होगी कि क्या मुस्लिम कंट्री आगे आकर चीनी मुसलमानों की मदद करेंगे या फिर अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए चीन में रह रहे मुस्लिमों को उनके हाल पर छोड़ देंगे और दूसरी बात दुनियां के अन्य देश इस पूरे मुद्दे क्या सोचते है

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