NCERT की किताबों से बाबरी मस्जिद, हिंदुत्व की राजनीति, 2002 के गुजरात दंगों, मणिपुर और अल्पसंख्यकों से जुड़े कई संदर्भ को हटाया गया

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राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी NCERT ने 11वीं-2वीं कक्षा की पॉलिटिकल साइंस की किताबों से बाबरी मस्जिद, हिंदुत्व की राजनीति, 2002 के गुजरात दंगों, मणिपुर और अल्पसंख्यकों से जुड़े कई संदर्भ हटा दिए हैं। ये बदलाव NCERT की नई किताबों में कब से देखने को मिलेंगे, यह अभी साफ नहीं है, क्योंकि नया सेशन शुरू हो गया है और ये किताबें अभी बाजार में नहीं आई हैं।

अभी देश के 23 राज्‍यों में NCERT सिलेबस पर आधारित किताबें पढ़ाई जाती हैं। इनमें उत्‍तर प्रदेश, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्‍तराखंड, गोवा, कर्नाटक, त्रिपुरा, हरियाणा, मिजोरम और दिल्‍ली शामिल हैं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के स्कूलों में भी यह किताबें पढ़ाई जाती हैं। एनसीईआरटी की पुस्तक से बाबरी मस्जिद का जिक्र क्यों हटा दिया गया है। वहीं इस बदलाव को लेकर एनसीईआरटी प्रमुख ने प्रतिक्रिया दी है। एनसीईआरटी निदेशक दिनेश सकलानी अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने कहा कि पाठ्यपुस्तक में किसी भी तरह के संसोधन में उनका हस्तक्षेप नहीं है। वहीं अब इस संशोधन को लेकर दिनेश सकलानी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में इतिहास तथ्यों से अवगत कराने के लिए पढ़ाया जाता है, न कि इसे युद्ध का मैदान बनाने के लिए। उन्होंने कहा कि पाठ्यपुस्तकों में संशोधन विषय विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है। कहा कि उनका इस प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि पाठ्यक्रम का भगवाकरण करने का कोई प्रयास नहीं है, पाठ्यपुस्तकों में सभी परिवर्तन साक्ष्य और तथ्यों पर आधारित हैं। प्रमुख ने किताबों में गुजरात दंगों और बाबरी मस्जिद से संबंधित संदर्भों को हटाने पर कहा, “हमें छात्रों को दंगों के बारे में क्यों पढ़ाना चाहिए, उद्देश्य हिंसक, अवसादग्रस्त नागरिक बनाना नहीं है। पाठ्यपुस्तकों में संशोधन एक वैश्विक प्रथा है, यह शिक्षा के हित में है।”
क्या है पूरा मामला? बता दें कि 12वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की एनसीईआरटी की किताब (NCERT Books) में बाबरी मस्जिद का नाम हटा दिया गया है। अब नई किताबों में इसे ‘तीन गुंबद वाला ढांचा’ कहा गया है। वहीं अयोध्या वाले चैप्टर को छोटा करके चार पेज से केवल दो में कर दिया गया है। इसमें बीजेपी की रथ यात्रा, मस्जिद को ढहाने में कार सेवकों की भूमिका, मस्जिद ढहाने के बाद हुई हिंसा, राष्ट्रपति शासन और अयोध्या में हुई हिंसा पर बीजेपी के खेद वाली बातों का जिक्र है।

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