बिहार हमेशा से मेहनतकश और आगे बढ़ाने की ललक रखने वाले लोगों के लिए काफी उर्वरा भूमि है बिहार की मिट्टी से निकले हुए लोगों ने विभिन्न क्षेत्रों में देश का नाम रोशन किया।
अपने पराक्रम की बदौलत पुरे देश मे अलग मुकाम हासिल करने वाले शख्स का नाम दशरथ मांझी था।जिन्होंने 22 वर्षों की अथाह मेहनत से पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बना दिया था।
बिहार के गया जिले में जन्मे दशरथ मांझी ने यह साबित किया कि किसी भी कार्य को करने का संकल्प कर लिया जाए तो वह काम मुश्किल नहीं है।
दशरथ मांझी के पहाड़ काटने के पीछे की कहानी भी काफी रोचक है। दशरथ मांझी मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करते थे पहाड़ के उस पार पत्नी उनके लिए खाना लेकर जाया करती थी।

Also Read-उत्तराखंड में पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज़, मई में हो सकते हैं मतदान
एक दिन पहाड़ पर से उनकी पत्नी का पैर फिसला और गिरकर वह गंभीर रूप से घायल हो गई अस्पताल दूर था पहुंचने मे काफी देर हो गई और पत्नी की मौत हो गईं।
इस घटना ने दशरथ मांझी को अंदर तक इतना झकझोर दिया था कि किसी और के साथ ऐसी घटना ना हो उसके लिए पहाड़ काटकर रास्ता बनाने निकल पड़े। दशरथ लगातार कड़ी मेहनत करते रहते थे।उनकी 22 वर्षो की मेहनत कामयाब हुई और पहाड़ काटकर रास्ता दशरथ ने रास्ता बना दिया था।पहाड़ की वजह से जो दूरी कभी गांव वालों के लिए कोसों में होती थी अब वह किलोमीटर में तब्दील हो गई थी।दशरथ की मेहनत से गया के अतरी और वज़ीरगंज ब्लॉक का फासला 80 किलोमीटर से घटकर 13 किलोमीटर रह गया.

केतन मेहता ने उन्हें गरीबों का शाहजहां करार दिया
दशरथ मांझी ने यह साबित किया कि आज के समय में कोई भी काम मुश्किल नहीं है अगर किसी काम को करने के लिए दृढ संकल्प ले लिया जाये तो वो काम किया जा सकता है।
साल 2007 में जब 73 वर्ष की उम्र में वो दुनिया छोड़ गए, तो पीछे रह गई पहाड़ के सीने पर उनके पराक्रम की छैनी से लिखी गई वो अमर कहानी जो आने वाली सदियों तक दशरथ मांझी के प्रेम और पुरुषार्थ को बयान करती रहेगी।