अखिलेश नहीं चाहते दलित बिरादरी के बच्चे पढ़े लिखे,अखिलेश के स्टैंड पर भड़के दलित चिंतक

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उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में व्यवस्था सुधारने के सरकार ने शिक्षकों के लिए डिजिटल अटेंडेंस का आदेश जारी किया…जिसके विरोध में पूरे प्रदेश के सरकारी शिक्षक प्रदर्शन पर उतर गए.सभी ने एक सुर में कुछ स्पेशल मांगें रखकर डिजिटल अटेंडेंस का बॉयकॉट किया.इस बॉयकॉट में शिक्षकों को पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का साथ मिला.

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अखीलेश यादव ने सरकार के इस फैसले को गलत साबित करते हुए शिक्षकों के समर्थन में इस हटाने की मांग की.शिक्षकों के विरोध से सरकार ने फैसले को स्थगित कर दिया.जिसके बाद अखिलेश यादव ने फिर लंबी चौड़ी पोस्ट कर शिक्षकों के समर्थन महिमा मंडन लिखा,और खुद को शिक्षक के परिवार का बताते हुए शिक्षकों का हमदर्द बताया.हालांकि अखिलेश यादव की पोस्ट देख शिक्षक भले खुश हुए हो लेकिन दलित चिंतक दिलीप मंडल ने अखिलेश पर करारा हमला बोलते हुए उन्हें गरीब और दलित विरोधी बता दिया हैं। दिलीप मंडल ने कहा सरकार के अच्छे फेसले की गर्भ में भ्रूण हत्या.इतना ही दिलीप मंडल ने फिर अखिलेश यादव के नाम एक लंबी चौड़ी पोस्ट लिखी.मंडल ने लिखा प्रिय @yadavakhilesh जी,हर बैंककर्मी अपनी ब्रांच में समय पर पहुँचता है, चाहे उनकी ब्रांच कितनी भी दूर दराज क्यों न हो। रेलवे स्टेशन या पोस्ट बीहड़ जंगल में हो तो भी रेलवे कर्मचारी वहीं रहता है…सैनिक जहां ड्यूटी लगती है, वहीं रहते हैं। पुलिस वाले जहां कहीं चौकी या थाना हो, अक्सर वहीं रहते भी हैं… सिंचाई विभाग और जंगलात में भी यही होता है…
प्राइवेट सेक्टर में तो आपको कहाँ होना है, ये च्वाइस ही नहीं है… जहां कंपनी ने कह दिया, वही अंतिम बात है..पर यूपी के सरकारी स्कूलों के कुछ टीचर शहरों में रहकर दूर गाँव के स्कूलों में ड्यूटी करना चाहते हैं…या अपने गाँव में रहकर ही कहीं दूर नौकरी करना चाहते हैं….जब अटैंडेंस लगाने की बात आती है तो विरोध में आंदोलन कर देते हैं और देश में आप जैसे नेता हैं जो गरीब और ख़ासकर एससी, एसटी और ओबीसी बच्चों का हित भूलकर चंद टीचर्स के साथ खड़े हो जाते हैं…ज़्यादातर टीचर काम करना चाहते हैं। पर आप लोगों को इससे क्या? …सरकारी स्कूलों में कौन पढ़ता है, ये शायद आप नहीं जानते होंगे…आपके बच्चे तो विदेश में पढ़ते हैं…यूपी के ग़रीबों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना और शोक! और आपको धिक्कार

दरअसल यूपी में प्राइमरी और माध्यमिक शिक्षकों को लेकर जनता का परसेप्शन खराब है…जिनके पास कुछ भी आमदनी है वह अपने बच्चों को अच्छी सुविधाओं वाले सरकारी स्कूल के बावजूद ऐसे शिक्षकों के पास नहीं भेजना चाहते…और फीस देकर भी टीने वाले स्कूल में भेज बच्चे के उज्जवल भविष्य की उम्मीद रखते है.ऐसे में सरकार ने परसेप्शन बदलने के लिए एक कड़ा फैसला लिया था.जिसके विरोध में शिक्षक लामबंद हो गए.अखिलेश यादव ने भी शिक्षकों का साथ दिया.हालांकि pda की बात करने वाले अखिलेश यादव भूल गए की सरकारी स्कूलों में पढ़ने वालों में दलित, ओबीसी और मुस्लिम वर्ग के बच्चे ज्यादातर है.जिनका भविष्य उन्हीं सरकारी शिक्षकों के हाथ है.लेकिन कुछ लोगों का मानना है की अखिलेश यादव ने शिक्षकों का साथ इसलिए दिया क्योंकि पहली बात तो उनकी संख्या 6 लाख से भी ज्यादा है ऐसे में उनके और परिवार के वोट मिलेंगे.साथ ही उनकी ड्यूटी चुनाव में लगती है…ऐसे में 2027 के चुनाव में शिक्षक वोट और सपोर्ट दोनों सपा को करेगा…

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